लॉक डाउन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश सभी को सेन्ड करे..
कोविड 19 कोरोना को मजाक में लेते हुए व्यापार करने वाले और लाकडाऊन में बिना वजह बाहर निकलने वालों की हकीकत..!!
एक दिन अचानक बुख़ार आता है..
- गले मे दर्द होता है..
- साँस लेने मे कष्ट होता है..
- Covid 19 टेस्ट की जाती है..
- 3 दिन तनाव में बीतते हैं..
- फिर टेस्ट +ve आने पर
- रिपोर्ट नगर निगम जाती है
- रिपोर्ट से हॉस्पिटल तय होता है
- फिर एम्बुलेंस आपके घर/ कॉलोनी में आती है
- कॉलोनीवासी खिड़की से झाँक कर तुम्हे देखते है
- कुछ एक की सहानभूति आप के साथ है
- कुछ मन ही मन हँस रहे है ओर चुपचाप कहते हैं, "बहुत माल बेचने की पड़ी थी, रोज़ व्यापार कर रहा था..!"
- एम्बुलेंस वाले उपयोग के कपड़े रखने का कहते है...
- बेचारे घरवाले तुम्हें जी भर के देखते हैं,
- तुम्हारी आँखों से आँसू बह रहे हैं..
- तभी "चलो! जल्दी बैठो !" की आवाज़ दी गई
- एम्बुलेंस का दरवाजा बन्द..
- सायरन बजाते रवानगी..
- फिर मोहल्ला / कॉलोनी सील कर दी..
- 14 दिन पेट के बल सोने कहा..
- दो वक्त का जीने योग्य खाना मिला..
- T.V. Mobile सब अदृश्य हो गए..
- सामने की दीवार पर माज़ी हाल (अतीत वर्तमान) के सारे दृश्य दिखने लगे..
अब
- आप ठीक हो गये, तो ठीक वो भी, जब 3 टेस्ट नेगेटिव आ जाये तो घर वापसी... लेकिन
- इलाज के दौरान यदि कोई अनहोनी आपके साथ हुई तो..
-तो आपके शरीर को प्लास्टिक मे पैक करके सीधे कब्रिस्तान या शवदाहगृह....ये धर्म के अनुसार अधूरा भी रहेगा !
- अपनो को अंतिम दर्शन भी नही..
- जनाज़े / अंत्येष्टि क्रियाकर्म में अपने वाले भी नहीं..
- सिर्फ परिजनों को मिलता है 1 'डेथ सर्टिफिकेट'..
और खेल खतम।
- फिर आपके लिए लोग आपस मे बाते करेंगे..
"बेचारा चला गया!"
"अच्छा इन्सान था!"
"पर लालच बहुत था !"
इसीलिये,
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घर में रहो, सुरक्षित रहो,
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