Saturday, February 6, 2021

#किसान बिल 2020#IndiaAgainstPropaganda #Agriculture Farm Bill 2020#Farmers Bill 2020By Amit Last Updated Dec 11, 2020

#किसान बिल 2020
#IndiaAgainstPropaganda 
#Agriculture Farm Bill 2020
#Farmers Bill 2020

By Amit Last Updated Dec 11, 2020

 मोदी सरकार किसानों की आय को बढ़ाने के लिए, अनेक प्रकार की योजनाओं और सेवाओं को शुरू कर रही है। जिसके माध्यम से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधर हो सके। और किसानों की आय को बढ़ाया जा सके। जिसके लिए मोदी सस्कार द्वारा एक नया किसान बिल लाया गया। जो किसानों की फसल, बाजार, फसल मूल्य तथा बाजार मूल्य आदि से जुड़ा हुआ था। Farmers Bill को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 14 सितंबर, 2020 को लोकसभा में प्रस्तुत किया था। जिसे 5 जून, 2020 को अध्यादेश के रूप में विधेयक रखा गया था। इस बिल का मुख्य उद्देश्य कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य को सरलीकरण करना।जो लोकसभा में 17 सितंबर 2020 को पारित किया गया। था जबकि राज्य सभा ने आज इस विधेयक को पारित कर दिया।

 
New Kisan Bill 2020 Hindi नया किसान कृषि किसान बिल 2020 की न्यू अपडेट के लिए लेख को अंत तक पढ़ें – किसान बिल आन्दोलन | 

किसान बिल के किन कानूनों में सरकार सुधार करने को हुई तैयार और कौन माँग है। कृषि बिल को लेकर अभी भी किसानों की पूरी खबर देखें

नया किसान बिल का क्यों हो रहा है विरोध ?
किसान संगठनों का आरोप है कि नए कानून के कर कृषि क्षेत्र पूंजीपतियों के हाथों में चला जाएगा जिसका नुकसान किसानों को होगा। क्योंकि सरकार अकाल, युद्ध, प्राकृतिक आपदा जैसी अन्य समय पर ही न्यूनतम मूल्य निर्धारित करेगी जैसे – कोरोना काल में सैनिटाइजर – मास्क पर लगाया था।

 
कृषि उत्पाद की जमाखोरी के कारण वस्तुओं की कीमत बढ़ जाएगी।
मंडी में किसानों के लिए न्यूनतम मूल्य निर्धारित होता है। जबकि नये कानून में यह स्पष्ट नहीं है। किसान को फसल का न्यूनतम मूल्य मिलेगा या नहीं। क्यों उत्पादन अधिक होने से कीमत घट सकती है।
APMC में किसानों को फसल के मूल्य में किसी प्रकार का धोखा धड़ी होने का डर नहीं रहता है। जबकि नए बिल अनुसार पैन कार्ड वाला कोई भी व्यापारी फसल खरीद सकता है।
कृषि से जुड़े तीन बिल, जो अब बन गए हैं कानून
3 कृषि कानून 2020 जिनका विरोध किया जा रहा है। जिसकी जानकारी निम्न प्रकार है –

First sale
केंद्र सरकार ने किसानों को देश में कहीं भी फसल बेचने को आजाद किया है। ताकि राज्यों के बीच कारोबार बढ़ेगा। जिससे मार्केटिंग और ट्रांस्पोर्टिशन पर भी खर्च कम होगा।

Second bill
इस बिल में सरकार ने किसानों पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क का प्रोविज़न किया गया है. यह बिल कृषि पैदावारों की बिक्री, फार्म सर्विसेज़, कृषि बिजनेस फर्मों, प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और एक्सपोर्टर्स के साथ किसानों को जुड़ने के लिए मजबूत करता है. कांट्रेक्टेड किसानों को क्वॉलिटी वाले बीज की सप्लाई यकीनी करना, तकनीकी मदद और फसल की निगरानी, कर्ज की सहूलत और फसल बीमा की सहूलत मुहैया कराई गई है.

Third bill
इस बिल में अनाज, दाल, तिलहन, खाने वाला तेल, आलू-प्‍याज को जरूरी चीजो की लिस्ट से हटाने का प्रावधान रखा गया है। जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिले।

Krishi Bill 2020 in Hindi – kisan Krishi Bill के बारे में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर जी ने कहा कि, भारतीय जनता पार्टिय के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने किसानों के हित के लिए अनेक प्रकार की योजनाओं तथा सेवाओं का शुभारम्भ किया है। जिससे किसानों को उनके उत्पाद की गई फसल की, अच्छी कीमत मिल सके। और किसानों की आर्थिक स्तर, सामजिक स्तर तथा जीवन स्तर उठ सके। इस प्रक्रिया के लिए भारत सरकार पिछले 6 सालों से अनेक प्रकार की योजनओं को शुरू कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि अनाजों की ख़रीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर जारी रहेगी। kisan Krishi Bill 2020 पर प्रधानमंत्री मोदी जी ने किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि, एमएसपी की दरों में 2014-2020 के बीच बढ़ोत्तरी की गई है। जो इस समय रबी सीजन के लिए एमएसपी की घोषणा आगामी सप्ताह में की जाएगी। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि इन विधेयकों में किसानों की सम्पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

नया किसान बिल के मुख्य प्रावधान- (Farmer Bill 2020 in Hindi)

नया किसान बिल में किसानों को फसल बेचने के लिए स्वतंत्र कर दिया है। अब कोई भी किसान अपनी फसल को मंडी के बहार भी व्यापारी के पास बेच सकता है।
किसान अपने फसल को देश के किसी भी हिस्से में कहीं भी बेच सकता है।
किसानों को किसी भी प्रकार का कोई भी उपकर नहीं देना होगा। साथ ही बिल के अनुसार अब माल ढुलाई का खर्च भी देना होगा।
नये किसान कृषि विधेयक के अनुसार किसानों को ई-ट्रेडिंग मंच प्रदान किया जायेगा। जिससे माध्यम से इलेक्ट्रोनिक निर्बाध व्यापार सुनिश्चित किया जा सके।
kisan Krishi Bill के तहत मंडियों के अतिरिक्त व्यापार क्षेत्र में फॉर्मगेट, कोल्ड स्टोरेज, वेयर हाउस, प्रसंस्करण यूनिटों पर भी व्यापार की स्वतंत्रता होगी।
इस बिल के माध्यम से किसान और व्यापारी सीधे एक दूसरे जुड़ सकेंगे जिससे बिचौलियों का लाभ समाप्त होगा।
शंकाएँ

सरकार द्वारा निर्धारत किया गया न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनाज की ख़रीद बंद हो जाएगा।
किसान फसल को मंडी से बहार बेचता है। तो एपीएमसी मंडियां समाप्त हो जाएंगी
ई-नाम जैसे सरकारी ई-ट्रेडिंग पोर्टल का क्या होगा?
समाधान

MSP पर पहले की तरह फसल की खरीद जारी रहेगी। किसान अपनी उपज एमएसपी पर बेच सकेंगे। आगामी रबी
सीजन के लिए एमएसपी अगले सप्ताह घोषित की जाएगी।
किसान को अनाज मंडी के अलावा दूसरा ऑप्शन भी मिलेगा।
सरकार द्वारा शुरू की गयी ई-नाम ट्रेडिंग व्यवस्था भी जारी रहेगी।
इलेक्ट्रानिक मंचों पर कृषि उत्पादों का व्यापार बढ़ेगा। इससे पारदर्शिता आएगी और समय की बचत होगी।
कृषि बिल क्या है और किसान की क्या मांग है ?
लेख   कृषि किसान बिल (कृषि विधेयक 2020)
 भाषा   हिंदी
 लाभार्थी   किसान
 उद्देश्य   फसल बेचने के लिए अन्य बाजार प्रदान करना

ਕਿਸਾਨ ਬਿਲ 2020

किसान बिल पर बैठक का नतीजा ?

किसान संगठन और केंद्र सरकार के बीच मंत्री मंडल के बीच 9-10-2020 को किसान कृषि बिल को लेखर अहम बैठक है। जिसमें सरकार कानून में संशोधन करने को लेकर किसानों से राय मांगेगी और बीच का रास्ता निकालने की बात रखेगी। सरकार का कहना है की नया कृषि कानून किसानों की आय को बढ़ाने के लिए बनाया गया है। न कि किसानों के ऊपर किसी प्रकार की दबाव बनाने के लिए बनाया गया है। 6 वीं दौर की बैठक में यह देखना खाद रहेगा। कि सरकार किसान बिल को वापस लेने के लिए तैयार होती है ? या कृषि बिल में कोई नया संशोधन किया जाता है ?

कृषि विधेयक के संबंध में लोग अनेक प्रकार की बातें फैला रहे हैं। जबकि कृषि विधेयक में किसान अब अपनी फसल कहीं भी बेचने को स्वतंत्र है। नये कृषि विधेयक के अनुसार सरकार MSP को जारी रखेगी। और किसानों को फसल मंडी के अलवा दूसरा ऑप्शन भी फसल बेचने के लिए प्रदान करेगी।
2021-22 रबी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य लिस्ट –
हम आपको रबी फसल 2020-21 न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्दिष्ट करने वाली पूरी तालिका प्रदान कर रहे हैं।

फसल – गेहूँ
RMS 2020-21 के लिए MSP – 1925 per quintal
RMS 2021-22 के लिए MSP – 1975 per quintal
उत्पादन की लागत 2021-22 – 960 per quintal
MSP में पूर्ण वृद्धि – 50 रुपये
लागत से अधिक (%) – 106

फसल – जौ
RMS 2020-21 के लिए MSP – 1525 per quintal
RMS 2021-22 के लिए MSP – 1600 per quintal
उत्पादन की लागत 2021-22 – 971per quintal
MSP में पूर्ण वृद्धि – 75 रुपये
लागत से अधिक (%) – 65

फसल – चना दाल
RMS 2020-21 के लिए MSP – 4875 per quintal
RMS 2021-22 के लिए MSP – 5100 per quintal
उत्पादन की लागत 2021-22 – 2866 per quintal
MSP में पूर्ण वृद्धि – 225 रुपये
लागत से अधिक (%) – 78

फसल – मसूर दाल
RMS 2020-21 के लिए MSP – 4800 per quintal
RMS 2021-22 के लिए MSP – 5100 per quintal
उत्पादन की लागत 2021-22 – 2864 per quintal
MSP में पूर्ण वृद्धि – 300 रुपये
लागत से अधिक (%) – 78

फसल – सरसों
RMS 2020-21 के लिए MSP – 4425 per quintal
RMS 2021-22 के लिए MSP – 4650 per quintal
उत्पादन की लागत 2021-22 – 2415 per quintal
MSP में पूर्ण वृद्धि – 225 रुपये
लागत से अधिक (%) – 93

फसल – कुसुम खेती
RMS 2020-21 के लिए MSP – 5215 per quintal
RMS 2021-22 के लिए MSP – 5327 per quintal
उत्पादन की लागत 2021-22 – 3551 per quintal
MSP में पूर्ण वृद्धि – 112 रुपये
लागत से अधिक (%) – 50

 

किसान बिल से जुड़ी अफवाह तथा सच्चाई –
न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य का क्‍या होगा?
झूठ: किसान बिल असल में किसानों को न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य न देने की साजिश है।
सच: किसान बिल का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य से कोई लेना-देना नहीं है। एमएसपी दिया जा रहा है और भविष्‍य में दिया जाता रहेगा।
मंडियों का क्‍या होगा?
झूठ: अब मंडियां खत्‍म हो जाएंगी।
सच: मंडी सिस्‍टम जैसा है, वैसा ही रहेगा।
किसान विरोधी है बिल?
झूठ: किसानों के खिलाफ है किसान बिल।
सच: किसान बिल से किसानों को आजादी मिलती है। अब किसान अपनी फसल किसी को भी, कहीं भी बेच सकते हैं। इससे ‘वन नेशन वन मार्केट’ स्‍थापित होगा। बड़ी फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के साथ पार्टनरशिप करके किसान ज्‍यादा मुनाफा कमा सकेंगे।
बड़ी कंपनियां शोषण करेंगी?
झूठ: कॉन्‍ट्रैक्‍ट के नाम पर बड़ी कंपनियां किसानों का शोषण करेंगी।
सच: समझौते से किसानों को पहले से तय दाम मिलेंगे लेकिन किसान को उसके हितों के खिलाफ नहीं बांधा जा सकता है। किसान उस समझौते से कभी भी हटने के लिए स्‍वतंत्र होगा, इसलिए लिए उससे कोई पेनाल्‍टी नहीं ली जाएगी।
छिन जाएगी किसानों की जमीन?
झूठ: किसानों की जमीन पूंजीपतियों को दी जाएगी।
सच: बिल में साफ कहा गया है कि किसानों की जमीन की बिक्री, लीज और गिरवी रखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। समझौता फसलों का होगा, जमीन का नहीं।
किसानों को नुकसान है?
झूठ: किसान बिल से बड़े कॉर्पोरेट को फायदा है, किसानों को नुकसान है।
सच: कई राज्‍यों में बड़े कॉर्पोरेशंस के साथ मिलकर किसान गन्‍ना, चाय और कॉफी जैसी फसल उगा रहे हैं। अब छोटे किसानों को ज्‍यादा फायदा मिलेगा और उन्‍हें तकनीक और पक्‍के मुनाफे का भरोसा मिलेगा।

When will the new amendment farmers bill ?
नया कृषि किसान संशोधन बिल सरकार और किसान संगठनों के बीच बैठक होने के बाद जो नतीजा निकलेगा। उसके बाद ही naya sanshodhan krishi kisan bill आयेगा।

15 करोड़ किसानों के देश भारत में 11 लाख किसानों वाले प्रांत पंजाब के 2-3 हजार खलिस्तानी किसानों की आढ़ लेकर नए कृषि कानूनों के विरुद्ध गुंडागर्दी वाला धरना शुरू करते हैं, और इस पूरे खेल का संचालन कैनेडा व् UK में बैठे खलिस्तानी आतंकियों द्वारा किया जाता है,

15 करोड़ किसानों के देश भारत में 11 लाख किसानों वाले प्रांत पंजाब के 2-3 हजार खलिस्तानी किसानों की आढ़ लेकर नए कृषि कानूनों के विरुद्ध गुंडागर्दी वाला धरना शुरू करते हैं, और इस पूरे खेल का संचालन  कैनेडा व् UK में बैठे खलिस्तानी आतंकियों द्वारा किया जाता है,

किसान ट्रैक्टर मार्च  के नाम पर पाकिस्तान के पालतू खलिस्तानी भारत के गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर दिनदहाड़े रेड करते हैं, राजधानी में हिंसा अराजकता मारकाट व पुलिस पर बर्बर आक्रमण का वीभत्स दृश्य दिखता है 510 पुलिसकर्मी घायल होते हैं, 

इस सबके बीच निरंतर भारत के सभी विपक्षी राजनीतिक दल और क्रिस्लामोकॉमि बुद्धिजीवी नेक्सस उन खालिस्तानीयों के पक्ष में किसानों का नाम लेकर वातावरण बनाने और सहानुभूति जुटाने में लगे रहते हैं

छब्बीस जनवरी पर खलिस्तानियों द्वारा किए तिरंगे के अपमान के बाद देश का मूड इस छद्म आंदोलन के प्रति बदल जाता है,

और फिर शुरू होता है भारत पर एक डिजिटल अटैक बड़े-बड़े ग्लोबल सेलिब्रिटीज द्वारा खालिस्तानी आतंकवाद को फारमर प्रोटेस्ट बताकर उठाया जाता है जिनमें विश्व की सबसे प्रसिद्ध पॉप स्टार रिहाना, विश्व की सबसे प्रचलित चाइल्ड एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग, पोर्नस्टार मियां खलीफा, ब्रिटेन की मेंबर ऑफ पार्लियामेंट और अमेरिका की नई नवेली वाइस प्रेसिडेंट कमला हैरिस की भतीजी भी खालिस्तानी आतंकवादियों की भाड़े की टट्टू बनकर उनके एजेंडा को पेडल करती और भारत विरोधी नैरेटिव फैलाती दिखती है,

परंतु कहा जाता है कि बड़े और महत्वपूर्ण कार्य कभी भी कम अक्ल वालों से नहीं करवाना चाहिए, उस सीख का पालन मंदबुद्धि धूर्त खलिस्तानियों द्वारा नहीं किया जाता और परम प्रकांड बुद्धिजीवी एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग खलिस्तानियों के गेम प्लान की पूरी टूलकिट गलती से ट्विटर पर पोस्ट कर देती है, जिससे पता चलता है की इस खालिस्तानी आतंकवादी हमले की पूरी प्लानिंग तो महीनों पहले हो गई थी जिसमें बारीक से बारीक डिटेल्स पर काम किया गया था, बकायदा नैरेटिव, इमोशनल कार्ड, प्रोज़ व् कोन्स और स्वॉट एनालिसिस तक की गई थी, साथ ही किस सेलिब्रिटी को कौन से हैशटैग साथ क्या ट्वीट करना है वह भी पूर्व निर्धारित था, और मैं भी देखकर एक बार को चकित रह गया कि किस प्रकार यह पूरा खेल इतने वेल ऑर्गेनाइज्ड, वेल सिंक्रोनाइज और वेल प्लैन्ड मैनर में खेला गया है,

क्योंकि ये संयोग तो हो नहीं सकता कि एक ही आर्टिकल एक ही हैशटैग सब सेलेब्रिटी एक ही एक सी शब्दावली के संग ट्वीट करें, और जिस दिन को टूलकिट में निर्धारित किया गया था ठीक उसी दिन करें, साथ ही जिस प्रकार भारतीय एंबेसी पर बवाल काटने की बातें कही गई थी ठीक उसी प्रकार वह भी उसी दिन देखने को मिले,

खेल स्पष्ट है बकायदा पैसे देकर इन सेलिब्रिटी से यह सब ट्वीट करवाए गए थे परंतु सबसे रोचक बात यह थी की टूलकिट में शेयर करने के लिए जो इमेजेस और शब्दावली प्रयोग की गई थी वो टिपिकल कांग्रेस के शहजादे राहुल गांधी की शब्दावली थी अडानी, अंबानी, जिओ, किसान, मजदूर वाली

जिससे इस खेल में पाकिस्तान के पालतू खालिस्तान के साथ कांग्रेस के सम्मिलित होने की भी मुहर लग जाती है, क्योंकि प्रोपेगेंडा में दिख रहे लोकल विषयों और शब्दावली के द्वारा भारतीय जनता को भ्रमित करने की ये ट्रेडमार्क कांग्रेसी भाषा रही है,

और क्योंकि सिखों के प्रति हिंदुओं के मन में कोई दुर्भावना ना होते हुए उनके प्रति अपनत्व का भाव है इसीलिए खालिस्तानी सिखों का प्रयोग किया गया और खालिस्तानी विचारधारा से प्रभावित विभिन्न सिख संगठनों को इस पूरे बवाल को बढ़ाने में और ग्राउंड पर रिसोर्सेज उपलब्ध कराने में इस्तेमाल भी किया गया,

यानी इस बार भी इस खेल के पीछे हमारा वही पुराना टिपिकल शत्रु निकला पाकिस्तान कांग्रेस और खलिस्तान

किंतु विचार कीजिए की इस डिजिटल अटैक में इनके मर्सिनरीज़ थे विश्व की सबसे प्रचलित पॉपस्टार, विश्व की सबसे प्रसिद्ध चाइल्ड एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग, पॉर्न स्टार मिया खलीफा, ब्रिटिश सांसद और स्वयं अमरीकी उपराष्ट्रपति की भतीजी यानी कि इस बार उनका भरपूर सहयोग वैश्विक लेफ्ट इकोसिस्टम भी करता हुआ दिखा,
अब सोचिए यह खेल किस लेवल पर खेला गया था और इसमें किस स्तर तक विदेशी शक्तियों शामिल थी, 

वास्तव में यह वैश्विक वामपंथी शक्तियों का दुनिया भर के विभिन्न देशों में किसी न किसी बहाने से उनकी सांस्कृतिक विरासत, उनकी पहचान को समाप्त कर अविश्वास, अराजकता, उत्पात, हिंसा और केओस द्वारा सत्ता हथियाने के उनके उद्देश्य में रोड़ा बन रही नेशनललिस्ट शक्तियों पर किया जा रहा सोफिस्टिकेटेड और हाईटेक आक्रमण है,

उन्होंने पहले इन्हीं हथकंडे द्वारा अमेरिका के उस राष्ट्रपति को हटा दिया जिसने कई दशकों में पहली बार अमेरिका को किसी युद्ध में नहीं धकेला, खुलकर इस्लामिक जिहादी आतंकवाद का नाम लेकर उसका विरोध किया विदेश में प्रोडक्शन यूनिट लगाकर बैठे अमेरिकी कंपनियों को वापस अमेरिका में आकर कार्य करने और लोकल्स को नौकरी देने पर जोर दिया और शांतिदूत शरणार्थियों को अमेरिका में शरण देने से साफ मना कर दिया, वह आदमी उनके मार्ग का बड़ा रोड़ा था इसीलिए ब्लैक लाइव्स मैटर के नाम पर लूट, खसोट, मारकाट, हिंसा आगजनी का षड्यंत्र रचा गया था,

और अब उसी वामपंथी इकोसिस्टम का निशाना भारत है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार के नेतृत्व में तेजी से विकास और उन्नति के पथ पर आगे बढ़ता हुआ न केवल आर्थिक और सैन्य प्रगति कर रहा है, अपितु अपने नागरिकों के जीवन स्तर में निरंतर सुधार कर रहा है और साथ ही अपनी सॉफ्ट पावर और कुशल डिप्लोमेसी द्वारा भी अपनी कीर्ति ध्वज नित नए शिखरों पर स्थापित करता जा रहा है, 

इस पूरे वामपंथी एकोसिस्टम के हमलों से निपटने का तरीका है भारत के राष्ट्रवादी खेमे द्वारा एकजुट होकर उनके धूर्तता पूर्ण  हथकंडों का पूरी शक्ति से तीक्ष्ण प्रतिकार करना, इतना तीक्ष्ण इतना तार्किक और इतना स्विफ्ट इतना सॉफिस्टिकेटेड जिसकी उन्होंने कल्पना तक न कि हो, और उस काउंटर के तेज व् ऊष्मा के आगे उनके चेहरों पर चढ़ा नैतिकता का मुखौटा पिघल जाये और उनका भद्दा कुरूप कलंकित कलुषित चेहरा उन्हें एक हास्य का पात्र बनाकर सीमित कर दे,

वैसे यदि आप इस खालिस्तानी हमले मात्र को देखकर विचलित हो रहे हैं तो विश्वास मानिए यह तो बस शुरुआत है, आने वाले समय में हमें इससे भी बड़े और गिरे हुए लेफ्ट इकोसिस्टम के नीचता से लिसड़े हुए आक्रमणों को न केवल देखना व् झेलना होगा बल्कि उनपर विजय भी प्राप्त करनी होगी, और यदि हम सब एकजुट रहे व् उनके जाल में नहीं फंसे, तो इस वामपंथी इकोसिस्टम पर हमारी विजय सुनिश्चित है।

Friday, February 5, 2021

मित्रों नीचे लिखा मेसेज लंबा जरूर है, पर पुरा पढें कि मोदी जी नें देश की सुरक्षा के लिए क्या किया है 👇🙏🙏One army retired officer had forwarded look at a glance ....*Some facts happened in last six years*

मित्रों नीचे लिखा मेसेज लंबा जरूर है, पर पुरा पढें कि मोदी जी नें देश की सुरक्षा के लिए क्या किया है 👇🙏🙏
One army retired officer had forwarded look at a glance ....

*Some facts happened in last six years*

Don't compare six years working with seventy years working ...

*"कुछ तो सोचना होगा और कुछ करना भी  होगा"*

मतदाता गलत, 
देश की संसद गलत, 
प्रधानमंत्री गलत,
मंत्रिमंडल गलत,
लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनी गई पूरी सरकार गलत,
कृषि कानून गलत,
370 का हटना गलत, 
जी एस टी गलत,
मेक इन इंडिया गलत,
आत्मनिर्भर भारत गलत,
राम मंदिर गलत,
घुसपैठियों को हटाने के लिये कानून गलत,
राफेल गलत,
सर्जिकल स्ट्राइक गलत,
एयर स्ट्राइक गलत,
सर्वोच्च न्यायालय गलत,
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति गलत,
समिति के सदस्य गलत,
जियो गलत,
जियो का टॉवर गलत,
पतंजली गलत,
रामदेव गलत,
मीडिया गलत, 
वैक्सीन गलत,
भारत देश ही गलत,

*बस सही है तो...*

सारे रास्तों पर डेरा जमाये आंदोलनकारी,
लोगों का रास्ता रोके आंदोलनकारी,
ऐश करते आंदोलनकारी,
राकेश टिकैत,
वामपंथी,
शाहीन बाग,
परिवारवादी पार्टियाँ,
चीन,
पाकिस्तान,
घुसपैठिये,
खालिस्तानी,
विघटनकारी, 
टुकड़े-टुकड़े गैंग,
दंगाई,
लुटियन्स गैंग,
आतंकवादी,
विदेशी फण्डिंग पर पल रहे देशद्रोही, 
तुष्टिकरण
अवार्ड वापसी गैंग,
नशेड़ियों की जमात,

*सही और गलत की परिभाषा ही शायद बदलनी पड़ेगी*
टाईम निकाल कर एक बार पढ लेना वतन से प्यार है तो। इन 6 साल में सरकार ने सेना को दिया क्या है। इसके बाद पेट्रोल डीजल पर रोना बन्द हो जाएगा।
● 36 :- राफेल मल्टीरोल फाइटर : 59,000 करोड़
● 7 :- प्रोजेक्ट-17A क्लास युद्ध-पोत : 50,000 करोड़
● 5 :- एयर डिफेंस SAM S-400 : 39,000 करोड़
● 22 :- अपाचे AH-64 और 15 शिनूक : 3 अरब डॉलर
● पुर्जे और गोला बारूद : 3 अरब डॉलर
● 6 :- अरिहंत क्लास सबमरीन : 23,652 करोड़
● 1 :- अकुला II क्लास न्यूक्लियर अटैक पनडुब्बी : 3.3 अरब डॉलर
● बराक-8 MRSAM एयर डिफेंस : 2 अरब डॉलर
● 73 :- ALH ध्रुव : 14,151 करोड़
● 464 :- मेन बैटल टैंक T-90 MS : 13,448 करोड़
● 7.47 लाख :- AK-203 असॉल्ट राइफल : 12,280 करोड़
● LRSAM बराक-8 : 1.41 अरब डॉलर
● 2 :- 'आकाश - NG' SAM रेजिमेंट : 9,100 करोड़
● 2 :- मल्टी यूटिलिटी वेसल 'HSL' : 9,000 करोड़
● 4 :- P-8i 'Poseidon' : 1 अरब डॉलर
● 'NASAMS' SAM : 1 अरब डॉलर
● 2 :- प्रोजेक्ट '11356 युद्धपोत' : 950 मिलियन डॉलर
● 6 :- 'अपाचे AH-64' : 930 मिलियन डॉलर
● 113 :- AL-31FP इंजन, सुखोई के लिए : 7,739 करोड़
● 145 :- हॉवित्जर 'M777' : 5,000 करोड़
● 66 :- ग्रीन पाइन रडार : 4,577 करोड़
● 100 :- K-9 'वज्र' हॉवित्जर : 4,366 करोड़
● 1 :- ब्रम्होस डिवीजन : 4,300 करोड़
● 'स्काई कैप्चर' वायु रक्षा प्रणाली : 550 मिलियन डॉलर
● 2 :- 'तलवार क्लास' युद्धपोत : 500 मिलियन डॉलर

● 164 :- ‘Litening-4’ टारगेटिंग पॉड्स**
● 250 :- 'स्पाइस-2000' सटीक स्टैंड-ऑफ बम**
● Python 5, I-Derby ER air to air missiles**
(** वाली तीनों डील कुल मिलाकर 3500 करोड़ की है)

● 150 :- 'ATAGS 155mm हॉवित्जर : 3,364 करोड़
● 13 :- नेवल गन 127mm Mk45 : 470 मिलियन डॉलर
● 2 :- 'पिनाका MBRL' रेजिमेंट : 3,000 करोड़
● 1 :- C-17 'ग्लोबमास्टर' : 366 मिलियन डॉलर
● 10 :- IAI 'Eitan' सशस्त्र ड्रोन : 366 मिलियन डॉलर
● 4 :- 'GSRE क्लास' सर्वेक्षण पोत : 2,500 करोड़
● 28 :- 'डोर्नियर Do 228' : 2,428 करोड़
● 2 :- DSRV सपोर्ट वेसल : 2,050 करोड़
● 2 :- सबमरीन रेस्क्यू 'DSRV' : 1,900 करोड़
● 72,400 :- सिग सायर कॉम्बैट राइफल्स : 1,798 करोड़
● 1 :- महासागर निगरानी जहाज (P-11184) : 1,500 करोड़
● 7 :- L&T क्लास अपतटीय गश्ती पोत : 1,432 करोड़
● 114 :- धनुष हॉवित्जर : 1,300 करोड़
● NBC वाहन : 1,265 करोड़
● 240 :- KAB-1500 बम : 1254 करोड़
● 5000 :- मिलन 2T ATGM : 1,200 करोड़
● इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल ICV's : 1,125 करोड़
● 'उच्च क्षमता रेडियो रिले' (HCRR) : 1,092 करोड़
● 5,917 :- बैरेट्टा स्कार्पियो स्नाइपर राइफल 8.36mm : 982 करोड़
● 1,500 :- M95 MS बैरेट .50 BMG एंटी मटेरियल राइफल
● उन्नत टारपीडो डेको सिस्टम (ATDS) : 850 करोड़
● 1.86 लाख :- बुलेट प्रूफ जैकेट : 693 करोड़
● नेवल MRSAM : 93 मिलियन डॉलर
● 1 :- सर्वे ट्रेनिंग वेसल (STV) : 626 करोड़
● 22 :- 'हार्पून' मिसाइल : 81 मिलियन डॉलर
● 13 :- NAMICA 'ATGM' : 524 करोड़
● 1 :- DRDO प्रौद्योगिकी प्रदर्शन पोत : 365 करोड़
● 300 :- M-46 Towed 'सारंग' (45 Cal) अपग्रेड : 200 करोड़
● 1.58 लाख :- बुलेट प्रूफ हेलमेट : 180 करोड़

📌 डीएसी ने 2014 के बाद 4.28 लाख करोड़ से अधिक रक्षा सौदों को मंजूरी दी है.

● 6 :- 'SSN क्लास' परमाणु पनडुब्बी : 60,000 करोड़
● 83 :- LCA 'तेजस' : 49,797 करोड़
● 6 :- प्रोजेक्ट 75-I क्लास सबमरीन : 40,000 करोड़
● 938 :- एयर डिफेंस गन : 5 अरब डॉलर
● 4 :- लैंडिंग हेलीकाप्टर डॉक : 25,000 करोड़
● 111 :- नेवल यूटिलिटी हेलीकाप्टर : 21,738 करोड़
● 200 :- कामोव 'Ka 226-T' : 20,000 करोड़
● 104 :- K-30 Bhio वायु रक्षा प्रणाली : 2.66 अरब डॉलर
● 814 :- सेल्फ प्रोपेल्ड ट्रक माउंटेड हॉवित्जर : 2.5 अरब डॉलर
● 6 :- 'पिनाका MBRL' रेजिमेंट : 14,633 करोड़
● 22 :- 'प्रिडिएटर - B' ड्रोन : 2 अरब डॉलर
● 6 :- अगली पीढ़ी की मिसाइल पोत : 13,500 करोड़
● 24 :- मल्टीरोल नेवल एएसडब्ल्यू हेलीकाप्टर : 1.8 अरब डॉलर
● 16 :- ASW Shallow Water Crafts : 12,000 करोड़
● 244 :- एयर डिफेंस गन : 1.5 अरब डॉलर
● 1,276 :- VSHORADS एयर डिफेंस : 1.5 अरब डॉलर
● 3 :- 'S-5 क्लास' SSBN परमाणु पनडुब्बी : 10,000 करोड़
● 118 :- अर्जुन मार्क-II MBT : 6,600 करोड़
● 2 :- AWACS 'EL/W-2090' : 800 मिलियन डॉलर
● 6 :- अपतटीय पोत NGOPVs : 4,941 करोड़
● 3.5 लाख :- कार्बाइन : 4,607 करोड़
● 41,000 :- लाइट मशीनगन 'LMG' : 3,000 करोड़
● युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस : 3,000 करोड़
● 15 :- हल्के लड़ाकू हेलीकाप्टर (LCH) : 2,911 करोड़
● 3 :- ABG-क्लास कैडेट प्रशिक्षण शिप : 2,700 करोड़
● 1000 :- इंजन, T-72 MBT के लिए : 2,300 करोड़
● 150 :- बख्तरबंद लड़ाकू वाहन : 2,200 करोड़
● 100 :- टारपीडो : 2000 करोड़
● 93,895 :- CQB कार्बाइन : 553.33 मिलियन डॉलर

 ये 50% भी नहीं प्रोजेक्ट काली और पहाड़ों पर गोरिल्ला युद्ध के लिए तैयार की गई एक कमांडो फोर्स ऐसे जाने कितने सीक्रेट प्रोजेक्ट है जिनकी जानकारी किसी को भी नहीं।

हजारों करोड़ रुपए बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन को दिए गए।
जिससे सीमा पर रोड बन रही है।
जिसकी वजह से चीन बौखलाया हुआ है।
1962 में युद्ध हारने की वजह ही ख़तम कर दी सरकार ने रोड प्रोजेक्ट पूरे करके। लगभग 85% रोड प्रोजेक्ट पूरे हो चुके है।

#डीजल पेट्रोल के लिए रोने वालो।
रूसी सहयोग से बनी भारतीय #सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल #ब्रह्मोस की लागत बीस करोड़ रूपए है. 
यानि पांच मिसाइल दाग दीं तो एक अरब रूपया स्वाहा. एक #राफेल फाइटर जेट की कीमत साढ़े #सोलह अरब रूपए है..!!

रूस को ताजा दिए इक्कीस मिग 29 और बारह #सुखोई 30 लड़ाकू विमानों की कीमत साठ अरब रूपए है. 
इसका #चालीस अरब रूपए भुगतान कर दिया गया है...!!

रूस से ही खरीदे जा रहे #मिसाइल रोधी सिस्टम S 400 की कीमत चालीस अरब रूपए है. #चिनूक, अपाचे ये सब मुफ्त नहीं मिले हैं इनपर अरबों खरबों खर्च हुआ है...!!

तोप का एक एक #गोला लाखों रूपए का है...छोटी से छोटी #मिसाइल भी एक #करोड़ से ऊपर की है...!!

मत भूलिए #कांग्रेस किस तरह सेना को #नंगा_बूचा छोड़ कर गई थी... #सैनिक फटे जूते पहने घूम रहे थे...न गोला #बारूद बचा था न #मनोबल...!!

सेना के बार बार चेताने पर भी सैन्य #साजोसामान नहीं खरीदा गया और रक्षा सौदों में #आपराधिक देरी हुई...!!

“बरसों पुराने लड़ाकू विमान उड़न #ताबूत कहलाये जाने लगे”

#शत्रु तीन तरफ से सीमा पर घात लगाए बैठा है और तुम डीजल पेट्रोल के दामों पर कपड़े फाड़ रहे हो.. !!
जयहिन्द 🇮🇳🇮🇳🇮🇳