15 करोड़ किसानों के देश भारत में 11 लाख किसानों वाले प्रांत पंजाब के 2-3 हजार खलिस्तानी किसानों की आढ़ लेकर नए कृषि कानूनों के विरुद्ध गुंडागर्दी वाला धरना शुरू करते हैं, और इस पूरे खेल का संचालन कैनेडा व् UK में बैठे खलिस्तानी आतंकियों द्वारा किया जाता है,
किसान ट्रैक्टर मार्च के नाम पर पाकिस्तान के पालतू खलिस्तानी भारत के गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर दिनदहाड़े रेड करते हैं, राजधानी में हिंसा अराजकता मारकाट व पुलिस पर बर्बर आक्रमण का वीभत्स दृश्य दिखता है 510 पुलिसकर्मी घायल होते हैं,
इस सबके बीच निरंतर भारत के सभी विपक्षी राजनीतिक दल और क्रिस्लामोकॉमि बुद्धिजीवी नेक्सस उन खालिस्तानीयों के पक्ष में किसानों का नाम लेकर वातावरण बनाने और सहानुभूति जुटाने में लगे रहते हैं
छब्बीस जनवरी पर खलिस्तानियों द्वारा किए तिरंगे के अपमान के बाद देश का मूड इस छद्म आंदोलन के प्रति बदल जाता है,
और फिर शुरू होता है भारत पर एक डिजिटल अटैक बड़े-बड़े ग्लोबल सेलिब्रिटीज द्वारा खालिस्तानी आतंकवाद को फारमर प्रोटेस्ट बताकर उठाया जाता है जिनमें विश्व की सबसे प्रसिद्ध पॉप स्टार रिहाना, विश्व की सबसे प्रचलित चाइल्ड एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग, पोर्नस्टार मियां खलीफा, ब्रिटेन की मेंबर ऑफ पार्लियामेंट और अमेरिका की नई नवेली वाइस प्रेसिडेंट कमला हैरिस की भतीजी भी खालिस्तानी आतंकवादियों की भाड़े की टट्टू बनकर उनके एजेंडा को पेडल करती और भारत विरोधी नैरेटिव फैलाती दिखती है,
परंतु कहा जाता है कि बड़े और महत्वपूर्ण कार्य कभी भी कम अक्ल वालों से नहीं करवाना चाहिए, उस सीख का पालन मंदबुद्धि धूर्त खलिस्तानियों द्वारा नहीं किया जाता और परम प्रकांड बुद्धिजीवी एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग खलिस्तानियों के गेम प्लान की पूरी टूलकिट गलती से ट्विटर पर पोस्ट कर देती है, जिससे पता चलता है की इस खालिस्तानी आतंकवादी हमले की पूरी प्लानिंग तो महीनों पहले हो गई थी जिसमें बारीक से बारीक डिटेल्स पर काम किया गया था, बकायदा नैरेटिव, इमोशनल कार्ड, प्रोज़ व् कोन्स और स्वॉट एनालिसिस तक की गई थी, साथ ही किस सेलिब्रिटी को कौन से हैशटैग साथ क्या ट्वीट करना है वह भी पूर्व निर्धारित था, और मैं भी देखकर एक बार को चकित रह गया कि किस प्रकार यह पूरा खेल इतने वेल ऑर्गेनाइज्ड, वेल सिंक्रोनाइज और वेल प्लैन्ड मैनर में खेला गया है,
क्योंकि ये संयोग तो हो नहीं सकता कि एक ही आर्टिकल एक ही हैशटैग सब सेलेब्रिटी एक ही एक सी शब्दावली के संग ट्वीट करें, और जिस दिन को टूलकिट में निर्धारित किया गया था ठीक उसी दिन करें, साथ ही जिस प्रकार भारतीय एंबेसी पर बवाल काटने की बातें कही गई थी ठीक उसी प्रकार वह भी उसी दिन देखने को मिले,
खेल स्पष्ट है बकायदा पैसे देकर इन सेलिब्रिटी से यह सब ट्वीट करवाए गए थे परंतु सबसे रोचक बात यह थी की टूलकिट में शेयर करने के लिए जो इमेजेस और शब्दावली प्रयोग की गई थी वो टिपिकल कांग्रेस के शहजादे राहुल गांधी की शब्दावली थी अडानी, अंबानी, जिओ, किसान, मजदूर वाली
जिससे इस खेल में पाकिस्तान के पालतू खालिस्तान के साथ कांग्रेस के सम्मिलित होने की भी मुहर लग जाती है, क्योंकि प्रोपेगेंडा में दिख रहे लोकल विषयों और शब्दावली के द्वारा भारतीय जनता को भ्रमित करने की ये ट्रेडमार्क कांग्रेसी भाषा रही है,
और क्योंकि सिखों के प्रति हिंदुओं के मन में कोई दुर्भावना ना होते हुए उनके प्रति अपनत्व का भाव है इसीलिए खालिस्तानी सिखों का प्रयोग किया गया और खालिस्तानी विचारधारा से प्रभावित विभिन्न सिख संगठनों को इस पूरे बवाल को बढ़ाने में और ग्राउंड पर रिसोर्सेज उपलब्ध कराने में इस्तेमाल भी किया गया,
यानी इस बार भी इस खेल के पीछे हमारा वही पुराना टिपिकल शत्रु निकला पाकिस्तान कांग्रेस और खलिस्तान
किंतु विचार कीजिए की इस डिजिटल अटैक में इनके मर्सिनरीज़ थे विश्व की सबसे प्रचलित पॉपस्टार, विश्व की सबसे प्रसिद्ध चाइल्ड एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग, पॉर्न स्टार मिया खलीफा, ब्रिटिश सांसद और स्वयं अमरीकी उपराष्ट्रपति की भतीजी यानी कि इस बार उनका भरपूर सहयोग वैश्विक लेफ्ट इकोसिस्टम भी करता हुआ दिखा,
अब सोचिए यह खेल किस लेवल पर खेला गया था और इसमें किस स्तर तक विदेशी शक्तियों शामिल थी,
वास्तव में यह वैश्विक वामपंथी शक्तियों का दुनिया भर के विभिन्न देशों में किसी न किसी बहाने से उनकी सांस्कृतिक विरासत, उनकी पहचान को समाप्त कर अविश्वास, अराजकता, उत्पात, हिंसा और केओस द्वारा सत्ता हथियाने के उनके उद्देश्य में रोड़ा बन रही नेशनललिस्ट शक्तियों पर किया जा रहा सोफिस्टिकेटेड और हाईटेक आक्रमण है,
उन्होंने पहले इन्हीं हथकंडे द्वारा अमेरिका के उस राष्ट्रपति को हटा दिया जिसने कई दशकों में पहली बार अमेरिका को किसी युद्ध में नहीं धकेला, खुलकर इस्लामिक जिहादी आतंकवाद का नाम लेकर उसका विरोध किया विदेश में प्रोडक्शन यूनिट लगाकर बैठे अमेरिकी कंपनियों को वापस अमेरिका में आकर कार्य करने और लोकल्स को नौकरी देने पर जोर दिया और शांतिदूत शरणार्थियों को अमेरिका में शरण देने से साफ मना कर दिया, वह आदमी उनके मार्ग का बड़ा रोड़ा था इसीलिए ब्लैक लाइव्स मैटर के नाम पर लूट, खसोट, मारकाट, हिंसा आगजनी का षड्यंत्र रचा गया था,
और अब उसी वामपंथी इकोसिस्टम का निशाना भारत है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार के नेतृत्व में तेजी से विकास और उन्नति के पथ पर आगे बढ़ता हुआ न केवल आर्थिक और सैन्य प्रगति कर रहा है, अपितु अपने नागरिकों के जीवन स्तर में निरंतर सुधार कर रहा है और साथ ही अपनी सॉफ्ट पावर और कुशल डिप्लोमेसी द्वारा भी अपनी कीर्ति ध्वज नित नए शिखरों पर स्थापित करता जा रहा है,
इस पूरे वामपंथी एकोसिस्टम के हमलों से निपटने का तरीका है भारत के राष्ट्रवादी खेमे द्वारा एकजुट होकर उनके धूर्तता पूर्ण हथकंडों का पूरी शक्ति से तीक्ष्ण प्रतिकार करना, इतना तीक्ष्ण इतना तार्किक और इतना स्विफ्ट इतना सॉफिस्टिकेटेड जिसकी उन्होंने कल्पना तक न कि हो, और उस काउंटर के तेज व् ऊष्मा के आगे उनके चेहरों पर चढ़ा नैतिकता का मुखौटा पिघल जाये और उनका भद्दा कुरूप कलंकित कलुषित चेहरा उन्हें एक हास्य का पात्र बनाकर सीमित कर दे,
वैसे यदि आप इस खालिस्तानी हमले मात्र को देखकर विचलित हो रहे हैं तो विश्वास मानिए यह तो बस शुरुआत है, आने वाले समय में हमें इससे भी बड़े और गिरे हुए लेफ्ट इकोसिस्टम के नीचता से लिसड़े हुए आक्रमणों को न केवल देखना व् झेलना होगा बल्कि उनपर विजय भी प्राप्त करनी होगी, और यदि हम सब एकजुट रहे व् उनके जाल में नहीं फंसे, तो इस वामपंथी इकोसिस्टम पर हमारी विजय सुनिश्चित है।
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